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14. शास्त्रकाराः (शास्त्र रचयिता) : Shastrakara class 10 sanskrit

January 26, 2022 by 10 Comments

इस पोस्‍ट में हमलोग बिहार बोर्ड संस्‍कृत कक्षा 10 पाठ 14 शास्त्रकाराः (शास्त्र रचयिता) (Shastrakara class 10 sanskrit) के प्रत्‍येक पंक्ति के अर्थ के साथ उसके वस्‍तुनिष्‍ठ और विषयनिष्‍ठ प्रश्‍नों के व्‍याख्‍या को पढ़ेंगे।

14. शास्त्रकाराः (शास्त्र रचयिता)

पाठ परिचय- यह पाठ नवनिर्मित संवादात्मक है जिसमें प्राचीन भारतीय शास्त्रों तथा उनके प्रमुख रचयिताओं का परिचय दिया गया है। इससे भारतीय सांस्कृतिक निधि के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होगी- यही इस पाठ का उद्देश्य है।

(भारते वर्षे शास्त्राणां महती परम्परा श्रूयते। शास्त्राणि प्रमाणभूतानि समस्तज्ञानस्य स्रोतःस्वरूपाणि सन्ति। अस्मिन् पाठे प्रमुखशास्त्राणां निर्देशपूर्वकं तत्प्र वर्तकानाञ्च निरूपणं विद्यते। मनोरञ्जनाय पाठेऽस्मिन् प्रश्नोत्तरशैली आसादिता वर्तते।)
भारतीय शास्त्रों की बहुत बड़ी परम्परा सुनी जाती है। शास्त्र प्रमाण स्वरूप समस्त ज्ञान का स्त्रोत स्वरूप है। इस पाठ में प्रमुख शास्त्रों का निर्देशपूर्वक उसके प्रवर्त्तकों का निरूपण है। इस पाठ में मनोरंजन के लिए प्रश्नोत्तर शैली अपनायी गयी है।

14. शास्त्रकाराः (शास्त्र रचयिता)

(शिक्षकः कक्षायां प्रविशति, छात्राः सादरमुत्थाय तस्याभिवादनं कुर्वन्ति ।)
(शिक्षक वर्ग में प्रवेश करते हैं छात्र लोग, आदरपूर्वक उठकर उनका अभिवादन करते हैं।)

शिक्षकः- उपविशन्तु सर्वे। अद्य युष्माकं परिचयः संस्कृतशास्त्रैः भविष्यति।
शिक्षकः- सभी लोग बैठ जाएँ। आज आपलोगों का परिचय संस्कृत शास्त्रों से होगा।

युवराजः- गुरुदेव । शास्त्रं किं भवति ?
युवराजः- गुरुदेव ! शास्त्र क्या होता है।

शिक्षकः- शास्त्रं नाम ज्ञानस्य शासकमस्ति। मानवानां कर्त्तव्याकर्त्तव्यविषयान् तत् शिक्षयति। शास्त्रमेव अधुना अध्ययनविषयः (Subject) कथ्यते, पाश्चात्यदेशेषु अनुशासनम् (discipline) अपि अभिधीयते। तथापि शास्त्रस्य लक्षणं धर्मशास्त्रेषु इत्थं वर्तते –
शिक्षकः- शास्त्र नाम का चीज ज्ञान का शासक है। मनुष्य के कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य विषयों की वह सीख देता है। शास्त्र ही आजकल अध्ययन विषय कहा जाता है। पश्चिमी देशों में अनुशासन भी कहा जाता है । इसके बाद भी शास्त्र का लक्षण धर्मशास्त्रों में है-

प्रवृत्तिर्वा निवृत्तिर्वा नित्येन कृतकेन वा।
पुंसां येनोपदिश्येत तच्छास्त्रमभिधीयते।

मनुष्यों को जिससे सांसारिक विषयों में अनुरक्ति अथवा विरक्ति अथवा मानव रचित विषयों का उचित ज्ञान मिलता है, उसे धर्म शास्त्र कहा जाता है। तात्पर्य यह कि जिस शास्त्र से किस आचरण को अपनाया जाए तथा किस आचरण को त्यागा जाए का ज्ञान प्राप्त हो, उसे धर्मशास्त्र कहते हैं।

Shastrakara class 10 Sanskrit

अभिनवः- अर्थात् शास्त्रं मानवेभ्यः कर्त्तव्यम् अकर्तव्यञ्च बोधयति। शास्त्रं नित्यं भवतु वेदरूपम्, अथवा कृतकं भवतु ऋष्यादिप्रणीतम्।
अभिनवः- अर्थात् शास्त्र मानवों के कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य का बोध कराता है। वेदरूप शास्त्र नित्य होता है अथवा ऋषियों द्वारा रचित शास्त्र कृत्रिम होता है।

शिक्षकः- सम्यक् जानासि वत्स ! कृतकं शास्त्रं ऋषयः अन्ये विद्वांसः वा रचितवन्तः। सर्वप्रथम षट् वेदाङ्गानि शास्त्राणि सन्ति। तानि – शिक्षा, कल्पः, व्याकरणम्, निरुक्तम्, छन्दः ज्योतिषं चेति।
शिक्षकः- सही जाने वत्स ! कृत्रिम शास्त्र ऋषियों या अन्य विद्वानों से रचा गया है। सर्वप्रथम वेद के अंग स्वरूप छः शास्त्र हैं- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, छन्द और ज्योतिष।

इमरानः- गुरुदेव ! एतेषां विषयाणां के-के प्रणेतारः ?
इमरानः- गुरुदेव। इन विषयों के कौन- कौन रचयिता हैं।

शिक्षकः- शृणुत यूयं सर्वे सावहितम्। शिक्षा उच्चारणप्रक्रियां बोधयति। पाणिनीयशिक्षा तस्याः प्रसिद्धो ग्रन्थः। कल्पः कर्मकाण्डग्रन्थः सूत्रात्मकः। बौधायन-भारद्वाज-गौतम वसिष्ठादयः ऋषयः अस्य शास्त्रस्य रचयितारः। व्याकरणं तु पाणिनिकृतं प्रसिद्धम्।
शिक्षकः- तुमलोग सावधान होकर सुनो। शिक्षा उच्चारण क्रिया का ज्ञान कराता है। पाणिनी शिक्षा उसका प्रसिद्ध ग्रन्थ है। कल्प सूत्रात्मक कर्मकाण्ड ग्रन्थ है। बौद्धायन- भारद्वाज-गौतम-वसिष्ठ आदि ऋषि इस शास्त्र के रचनाकार हैं। व्याकरण तो पाणिनीकृत प्रसिद्ध है।

निरुक्तस्य कार्य वेदार्थबोधः। तस्य रचयिता यास्कः। छन्दः पिङ्गलरचिते सूत्रग्रन्थे प्रारब्धम्। ज्योतिषं लगधरचितेन वेदाङ्गज्योतिषग्रन्थेन प्रावर्तत।
निरुक्त का कार्य वेद के अर्थ को बोध कराना है। उसके रचयिता यास्क हैं। छन्दशास्त्र पिङ्गल रचित ग्रन्थ है। ज्योतिषशास्त्र को लगध के द्वारा रचित वेदांग ज्योतिष ग्रन्थ से लिखा गया।

अब्राहमः- किमेतावन्तः एव शास्त्रकाराः सन्ति ?
अब्राहमः- क्या ये सब ही शास्त्रकार लोग हैं।

शिक्षकः- नहि नहि। एते प्रवर्तकाः एव। वस्तुतः महती परम्परा एतेषां शास्त्राणां परवर्तिभिः सञ्चालिता। किञ्च, दर्शनशास्त्राणि षट् देशेऽस्मिन् उपक्रान्तानि।
शिक्षकः- नहीं नहीं ! ये सभी संस्थापक ही हैं। वस्तुतः बहुत बड़ी परम्परा इन शास्त्रों को पूर्व के लोगों के द्वारा चालायी गयी है। क्योंकि इस देश में छः दर्शनशास्त्र को चलाया गया।

श्रुतिः- आचार्यवर ! दर्शनानां के-के प्रवर्तकाः शास्त्रकाराः ?
श्रुतिः- आचार्य श्रेष्ठ ! दर्शनशास्त्र को चलाने वाले कौन-कौन शास्त्रकार हैं।

शिक्षकः- सांख्यदर्शनस्य प्रवर्तकः कपिलः। योगदर्शनस्य पतञ्जलिः। एवं गौतमेन न्यायदर्शनं रचितं कणादेन च वैशेषिकदर्शनम्। जैमिनिना मीमांसादर्शनम्, बादरायणेन च वेदान्तदर्शनं प्रणीतम्। सर्वेषां शताधिकाः व्याख्यातारः स्वतन्त्रग्रन्थकाराश्च वर्तन्ते।
शिक्षकः- सांख्य दर्शन को चलाने वाले कपिल हैं। योगदर्शन के पतंजलि हैं। उसी प्रकार गौतम के द्वारा न्याय दर्शन को रचा गया, कनाद के द्वारा वैशेषिक दर्शन की रचना हुई। जैमिनि के द्वारा मीमांशा दर्शन की रचना हुई और बादरायण के द्वारा वेदांत दर्शन लिखा गया। सबों में सौ से अधिक व्याख्याता और स्वतंत्र ग्रन्थाकार हैं।

गार्गी- गुरुदेव ! भवान् वैज्ञानिकानि शास्त्राणि कथं न वदति ?
गार्गी- गुरुदेव ! वैज्ञानिक शास्त्र के बारे में क्यों नहीं बोलते हैं ?

शिक्षकः- उक्तं कथयसि । प्राचीनभारते विज्ञानस्य विभिन्नशाखानां शास्त्राणि प्रावर्तन्त। आयुर्वेदशास्त्रे चकरसहिता, सुश्रुतसंहिता चेति शास्त्रकारनाम्नैव प्रसिद्ध स्तः। तत्रैव रसायनविज्ञानम्, भौतिकविज्ञानञ्च अन्तरर्भू स्तः। ज्योतिषशास्त्रेऽपि खगोलविज्ञानं गणितम् इत्यादीनि शास्त्राणि सन्ति। आर्यभटस्य ग्रन्थः आर्यभटीयनामा प्रसिद्धः ।
शिक्षकः- कहा जाता है । प्राचीन भारत में विज्ञान के विभिन्न शाखाओं के शास्त्रों को रचा गया। आयुर्वेद शास्त्र में चरक संहिता और सुश्रुतसंहिता शास्त्रकार के नाम से दोनों प्रसिद्ध हैं। उसमें ही रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान समाहित है। ज्योतिष शास्त्र में भी खगोल विज्ञान गणित इत्यादि शास्त्र हैं। आर्यभट का ग्रन्थ आर्यभटीयनामा प्रसिद्ध हैं।

एवं वराहमिहिरस्य बृहत्संहिता विशालो ग्रन्थः यत्र नाना विषयाः समन्विताः। वास्तुशास्त्रमपि अत्र व्यापक शास्त्रमासीत्। कृषिविज्ञानं च पराशरेण रचितम्। वस्तुतो नास्ति शास्त्रकाराणाम् अल्पा संख्या।
वास्तुशास्त्र भी यहाँ बहुत बड़ा शास्त्र था। और कृषि विज्ञान को पराशर के द्वारा रचना की गयी। इसी प्रकार वराहमिहिर का वृहतसंहिता विशाल ग्रन्थ है जिसमें अनेक विषय समन्वित हैं।

वर्गनायकः- गुरुदेव ! अद्य बहुज्ञातम्। प्राचीनस्य भारतस्य गौरवं सर्वथा समृद्धम्।
वर्गनायकः- गुरुदेव! आज बहुत जानकारी हुई। प्राचीन भारत का गौरव हमेशा समृद्ध रहा है।

(शिक्षकः वर्गात् निष्क्रामति। छात्राः अनुगच्छन्ति)
(शिक्षक वर्ग से निकलते हैं। उनके पीछे-पीछे छात्र भी निकलते हैं।) Chapter 14 Shastrakara class 10 sanskrit

शास्त्रकाराः Objective Questions
प्रश्‍न 1. न्यायदर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?
(A) कपिल
(B) गौतम

(C) कणाद
(D) पतंजली

उत्तर-(B) गौतम

प्रश्‍न 2. आर्य भट्टीयम किसकी रचना है?
(A) पराशर की
(B) चरक की

(C) सुश्रुत की
(D) आर्यभट्ट की

उत्तर-(D) आर्यभट्ट की

प्रश्‍न 3. शास्त्र मानवों को किसका बोध कराता है?
(A) समझ
(B) कर्तव्याकर्तव्य

(C) मन
(D) चिंता

उत्तर-(B) कर्तव्याकर्तव्य

प्रश्‍न 4. वेदरूपी शास्त्र क्या होता है?
(A) अनित्य
(B) नित्य

(C) कृत्य
(D) भृत्य

उत्तर-(B) नित्य

प्रश्‍न 5. वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ कौन-सा है?
(A) आचार संहिता
(B) विचार संहिता

(C) वृहतसंहिता
(D) मंत्रसंहिता

उत्तर-(C) वृहतसंहिता

प्रश्‍न 6. ऋषयादि प्रणीत को क्या कहते हैं?
(A) भृतक
(B) मृतक

(C) कृतक
(D) हृतक

उत्तर-(C) कृतक

प्रश्‍न 7. ऋषि गौतम ने किस दर्शन की रचना की?
(A) सांख्य दर्शन
(B) न्याय दर्शन

(C) योग दर्शन
(D) चन्द्र दर्शन

उत्तर-(B) न्याय दर्शन

प्रश्‍न 8. निरुक्त का क्या कार्य है?
(A) यथार्थ बोध
(B) वेदार्थ बोध

(C) अर्थ बोध
(D) तत्त्व बोध

उत्तर-(B) वेदार्थ बोध

प्रश्‍न 9. शास्त्र किसके लिए कर्त्तव्यों और अकर्तव्य का विधान करते हैं?
(A) दानवों के लिए
(B) मानवों के लिए

(C) छात्रों के लिए
(D) पशुओं के लिए

उत्तर-(B) मानवों के लिए

प्रश्‍न 10. मीमांसा दर्शन के रचनाकार कौन हैं?
(A) जैमिनी
(B) पाणिनी

(C) पराशर
(D) सुश्रुत

उत्तर-(A) जैमिनी

प्रश्‍न 11. महर्षि यास्क द्वारा रचित ग्रंथ का क्या नाम है?
(A) निरूक्तम्
(B) शुल्ब सूत्र

(C) न्यायदर्शन
(D) चरक संहिता

उत्तर-(A) निरूक्तम्

प्रश्‍न 12. भारतवर्ष में किसकी महती परम्परा सुनी जाती है?
(A) पुस्तक
(B) ग्रंथ

(C) शास्त्र
(D) कोई नहीं

उत्तर-(C) शास्त्र

प्रश्‍न 13. वर्ग में कौन प्रवेश करता है?
(A) शिक्षक
(B) छात्र

(C) प्राचार्य
(D) लिपिक

उत्तर-(A) शिक्षक

प्रश्‍न 14. किसके छः अंग हैं?
(A) रामायण
(B) महाभारत

(C) पुराण
(D) वेद

उत्तर-(D) वेद

प्रश्‍न 15. छात्र किसका अभिवादन करते हैं?
(A) शिक्षक
(B) बालक

(C) राजा
(D) छात्र

उत्तर-(A) शिक्षक

प्रश्‍न 16. किसका व्याकरण प्रसिद्ध है?
(A) व्यास
(B) पाणिनी

(C) चाणक्य
(D) आर्यभट्ट

उत्तर-(B) पाणिनी

प्रश्‍न 17. वेदांग कितने हैं?
(A) तीन
(B) पाँच

(C) छः
(D) चार

उत्तर-(C) छः

प्रश्‍न 18. ज्योतिष के रचयिता कौन हैं?
(A) व्यास
(B) पाणिनी

(C) लगधर
(D) यास्क

उत्तर-(C) लगधर

प्रश्‍न 19. कर्मकांड के रचनाकार कौन हैं?
(A) व्यास
(B) गौतम

(C) चाणक्य
(D) यास्क

उत्तर-(B) गौतम

प्रश्‍न 20. छंद के रचयिता कौन हैं?
(A) व्यास
(B) पाणिनी

(C) पिंगल
(D) यास्क


उत्तर- (C) पिंगल

14.शास्त्र कारा: (शास्त्र रचयिता) Subjective Questions
लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20-30 शब्दों में) ____दो अंक स्तरीय
प्रश्‍न 1. शास्त्रमानवेभ्यः किं शिक्षयति?  (2018A)
उत्तर- शास्त्र मनुष्य को कर्तव्य-अकर्तव्य का बोध कराता है। शास्त्र ज्ञान का शासक होता है। सुकर्म-दुष्कर्म, सत्य-असत्य आदि की जानकारी शास्त्र से ही मिलती है।

प्रश्‍न 2. षट् वेदांगों के नाम लिखें। (2020AІІ)
उत्तर- षट् वेदांग हैं- शिक्षा, कल्प , व्याकरण, निरूक्तम, छन्द और ज्योतिष ।

प्रश्‍न 3. भारतीय दर्शनशास्त्र और उनके प्रवर्त्तकों की चर्चा करें।  (2020AІ)
उत्तर- भारतीय दर्शनशास्त्र छः हैं । सांख्य-दर्शन के प्रवर्तक कपिल, योग-दर्शन के प्रवर्तक पतञ्जलि, न्याय-दर्शन के प्रवर्तक गौतम, वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कणाद, मीमांसा-दर्शन के प्रवर्तक जैमिनी तथा वेदांत-दर्शन के प्रवर्तक बादरायण ऋषि हैं।

प्रश्‍न 4. ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत कौन-कौन शाखा तथा उनके प्रमुख ग्रन्थ कौन से हैं? (2018A)
उत्तर-ज्योतिषशास्त्र के अन्तर्गत खगोलविज्ञान, गणित आदि शास्त्र हैं। आर्यभटीयम, वृहत्संहिता आदि उनके प्रमुख ग्रन्थ हैं।

प्रश्‍न 5.कल्प ग्रन्थों के प्रमुख रचनाकारों का नामोल्लेख करें।  (2018A)
उत्तर- कल्पग्रन्थों के प्रमख रचनाकार बौधायन, भारद्वाज, गौतम, वशिष्ठ आदि हैं।

प्रश्‍न 6. शास्त्र मनुष्यों को किन-किन चीजों का बोध कराता है? (2013A,2014A)
उत्तर-शास्त्र मनुष्यों को कर्तव्य और अकर्तव्य का बोध कराता है। यह सत्य-असत्य और सही काम तथा गलत कामों के बारे में जानकारी देता है।

प्रश्‍न 7.वेदांग कितने हैं? सभी का नाम लिखें। (2013A, 2015C)
अथवा, वेद कितने हैं? सभी के नाम लिखें। (2014C)
अथवा, वेदांगों के नाम लिखें। (2018A)
उत्तर- वेदांग छह हैं- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष ।

प्रश्‍न 8. शास्वकाराः पाठ में किस विषय पर चर्चा की गई है?  (2013A)
उत्तर-शास्त्रकारा: पाठ में शास्त्रों के माध्यम से सदगुणों को ग्रहण करने की प्रेरणा है । इससे हमें अच्छे संस्कार की सीख मिलती है। यश प्राप्त करने की शिक्षा भी मिलती है।

प्रश्‍न 9. शास्त्रकाराः’ पाठ के आधार पर संस्कृत की विशेषता बताएँ। (2016A)
उत्तर- ‘शास्त्रकाराः’ पाठ के अनुसार भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृत शास्त्रों में वर्णित है। संस्कृत में ही वेद, वेदांग, उपनिषद् तथा दर्शनशास्त्र रचित हैं। इस प्रकार संस्कृत लोगों को कर्तव्य-अकर्तव्य, संस्कार, अनुशासन आदि की शिक्षा देता है ।

प्रश्‍न 10. ‘शास्वकारा:’ पाठ के आधार पर शास्त्र की परिभाषा अपने शब्दों में लिखें।  (2017A)
उत्तर-सांसारिक विषयों से आसक्ति या विरक्ति, स्थायी, अस्थायी या कृत्रिम उपदेश जो लोगों को देता है उसे शास्त्र कहतेहैं । यह मानवों के कर्तव्य और अकर्तव्य का बोध कराता है । यह ज्ञान का शासक है । Chapter 14 Shastrakara class 10 sanskrit

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Filed Under: Class 10th Sanskrit

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Comments

  1. SKumar says

    August 19, 2022 at 9:51 am

    Chapter 4 sanskrit sahity lekhika ke sthan par chapter 14 ankit hai ise sudhar karen.

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  2. Rashmi says

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